गरमा गरम चाह… मुहमे पानी आगइल का ? – श्याम सर्राफ

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माटी के गिलास भा रामगिलास मे चाह पिए के माजा दुसर कहाँ बा ? सोन-सोन माटी के सुवाद मुह से ना जाला … आधुनिकता के सन्गे लोग इ सब चिज भोर परारहल बा बाकिर अभि भी इ चाह के सुवाद बीरगंज के आदर्शनगर मे लिहल जा सकेला …

तस्वीर : श्याम सर्राफ 

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