भईल समाज अपाहिज: अनिल सर्राफ

स-समाज के बात छोड़ बात भईल बरियारी के पार्टी पौलेसी के गांव जवार भईल अब रह ना गईल यारी के प्यार मुहबब्त अब नईखे कमी बा समझदारी के बिकास वाला...

कविता के शीर्षक: ”पुलिस वाला गुण्डा” – अनिल सर्राफ

पढले रहिँ  सच्चा देश प्रेमी होला पुलिसवाला । बाकिर ई का देखके मिलता हाय रे उपरवाला ।। शान वाला वरदी मे रक्षक भइले देश के भक्षक...

भोजपुरी अनियमित क्रिया (Irregular Verbs):

भोजपुरी अनियमित क्रिया (Irregular Verbs): V1                                       ...

बदमास जमिनदार के मिलल गुरु – गोविन्द दुबे (भोजपुरी लघुकथा)

एगो गाँव मे बहुते वडका जमिनदार जी रलन । दु गो बच्चाके जलम दिहला के बाद उनकर मेहरारु के मुअला बहुते दिन होगइल रहे...

शेर से बडा कुकुर – (भोजपुरी लघु काहानीः गोविन्द दुबे)

एगो गाँवमे बहुते धनिमनी जमिनदार रहलन । ऊ अपना के शेर कहत रहलन । एहिसे उ एगो शेर भि पोसले रहलन जेकरा के देखे...

भोजपुरी कहावत: I

भोजपुरी कहावत: सेर मरद पसेरी बरद । सेराइल बा सथाइल बा, बखरवो कहीं जाई ! सोना दहाइल जाए, आ कोईला प छापा । सोना...

चन्दा मामा दूरके: बालगीत

छोट बच्चा के रूसल अवुरी मानल सभ केहु देखले होई आ कईले होई । आमतौर प इ गीत महतारी अपना लईकन के खाना खाए...

आउ रे गइया निनर वन से: बालगीत

लोरी- उ गीत जवन कि महतारी अपना छोट लईकन के सुतावे खातिर गावेले ।शायद एकरा सा जादा मशहूर लोरी कवनो ना होई । आउ रे...

घुघुवा माना, उपजे धाना: बालगीत

पहिले के आजी-बाबा, चाहे परिवार के कवनो बड़ सदस्य जब लईकन के अपना गोड प बईठाके झुलुहा झुलावत रहले त ए गीत के गावत...

चंदा मामा आरेआवऽ, पारेआवऽ: बालगीत

छोट बच्चाके रूसल अवुरी मानल सभकेहु देखले होई आ कईले होई । आमतौर प इ गीत महतारी अपना लईकन के खाना खियावेके घरी गावत...

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