बदमास जमिनदार के मिलल गुरु – गोविन्द दुबे (भोजपुरी लघुकथा)

एगो गाँव मे बहुते वडका जमिनदार जी रलन । दु गो बच्चाके जलम दिहला के बाद उनकर मेहरारु के मुअला बहुते दिन होगइल रहे...

शेर से बडा कुकुर – (भोजपुरी लघु काहानीः गोविन्द दुबे)

एगो गाँवमे बहुते धनिमनी जमिनदार रहलन । ऊ अपना के शेर कहत रहलन । एहिसे उ एगो शेर भि पोसले रहलन जेकरा के देखे...

जदि इ ७ गो गलति अपने करेम त घर मे कभि ना होइ लक्ष्मी...

आर्थिक समस्या हर केहु के जीनगी मे होखेला आ ई समस्या के दुर करे खातिर खुब मेहनत करेला लोग बाकिर कवनो फल ना मिलेला...

11 अगस्त के गुरु होहिये मार्गी, जानिं आपन राशि पर कईसन रहि एकर असर

देवतालोगन के गुरु बृहस्पति 11 अगस्त के वक्री से मार्गी होखिहे । गुरु लगभग 13 महीना तक एकेगो राशि में रहेनि । गुरु के...

भोजपुरी कहावत: I

भोजपुरी कहावत: सेर मरद पसेरी बरद । सेराइल बा सथाइल बा, बखरवो कहीं जाई ! सोना दहाइल जाए, आ कोईला प छापा । सोना...

चन्दा मामा दूरके: बालगीत

छोट बच्चा के रूसल अवुरी मानल सभ केहु देखले होई आ कईले होई । आमतौर प इ गीत महतारी अपना लईकन के खाना खाए...

आउ रे गइया निनर वन से: बालगीत

लोरी- उ गीत जवन कि महतारी अपना छोट लईकन के सुतावे खातिर गावेले ।शायद एकरा सा जादा मशहूर लोरी कवनो ना होई । आउ रे...

घुघुवा माना, उपजे धाना: बालगीत

पहिले के आजी-बाबा, चाहे परिवार के कवनो बड़ सदस्य जब लईकन के अपना गोड प बईठाके झुलुहा झुलावत रहले त ए गीत के गावत...

चंदा मामा आरेआवऽ, पारेआवऽ: बालगीत

छोट बच्चाके रूसल अवुरी मानल सभकेहु देखले होई आ कईले होई । आमतौर प इ गीत महतारी अपना लईकन के खाना खियावेके घरी गावत...

ओका बोका तीन-तड़ोका: बालगीत

जब हम छोट रहनी त देखले रहनी कि घरमें सभ केहु छोट बबुआ- बचिया के खेलावतघरी, गुद-गुदावत घरीए गीत के गावत रहे । ओका बोका...